मेरा परिचय

यशपाल सिंह 'रवि'
मेरा जन्म चन्द्रपुर, जिला सहारनपुर (उ॰प्र॰) के एक साधारण किसान परिवार में 06 जनवरी 1961 अर्थात माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (उत्तर भारत के प्रसिद्ध त्यौहार सकट / तिल सकरात/ गणेश चौथ) को हुआ।
घरेलू नाम जसपाल होने के कारण सब लोग प्यार से जस्सू कह कर पुकारा करते थे।प्राथमिक पाठशाला में प्रवेश के दौरान हेडमास्टर जी ने नाम और जन्म तिथि बदल कर जसपाल की जगह यशपाल सिंह एवं जन्म-तिथि 01 मार्च 1960 कर दिया। प्रारम्भिक शिक्षा गाँव की पाठशाला में ही हुई जबकि माध्यमिक शिक्षा पास के गाँव में स्थित 'आदर्श जूनियर हाई स्कूल, बड़गाँव(सहारनपुर)' में 1972-1975 तक प्राप्त की।हाई स्कूल एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा के लिये 'महाराणा प्रताप स्मारक इन्टर कॉलिज, शिमलाना, सहारनपुर (उ.प्र.)' में सन् 1975-1979 तक पढ़ाई की। तत्पश्चात व्यावसायिक शिक्षा हेतु कन्हैया लाल पालिटेक्निक, रुड़की, (उ.प्र.) [उस समय रुड़की उत्तर प्रदेश का हिस्सा थी] प्रवेश लेकर 1972 में इलेक्ट्रानिक्स इन्जीनियरिंग म़ें त्रिवर्षीय डिप्लोमा प्राप्त किया।
शासकीय सेवा के सफ़र की शुरूआत सन् 1972 से भारत सरकार, वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग के संस्थान प्रतिभूति कागज़ कारखाना, होशंगाबाद (म.प्र.) से एक साधारण कर्मचारी के रूप में हुई। परन्तु माता-पिता से विरासत मे मिली मेहनत, लगन और ईमानदारी की शिक्षा को अपने जीवन का अंग बनाकर तरक्की की सीढ़ियाँ चढ़ना प्रारम्भ किया और सन् 1990 में संघ लोक सेवा आयोग (यू.पी.एस.सी.), नई दिल्ली द्वारा किये गये चयन से प्रतिभूति कागज़ कारखाना, होशंगाबाद (म.प्र.) के लिये अभियन्ता (ई.एंड़.आई.) के पद पर नियुक्ति हुई।
शासकीय कार्यों एवं जिम्मेदारियों का निष्पादन पूर्ण समर्पण के साथ करते हुये उच्च शिक्षा हेतु प्रयास जारी रखे और 1995 में 'इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली' से 'डिप्लोमा इन मेनेजमेंट की उपाधि प्राप्त की, एवं सन् 2001 में 'इंस्टीटयूट आफ़ इंजीनियरिंग' में डिग्री प्राप्त की। और वर्तमान में प्रतिभूति कागज़ कारखाना, होशंगाबाद (म.प्र.) के सहायक प्रबंध (ई एडं आई) के पद पर रहते हुऐ अन्य पदों जैसे उप प्रबंधक (उपार्जन), इंचार्ज आई.टी. एवं जन सूचना अधिकारी की महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारियों को पूर्ण दायित्व के साथ निभा रहा हूँ। सांस्कृतिक, खेल-कूद एवं सामाजिक गतिविधियों में बचपन से ही रुचि है, बाल्यावस्था में ही सुभद्राकुमारी चौहान की 'झाँसी की रानी', रसखान के सवैये, सूरदास के पद, गिरधर की कुंडलियाँ, भूषण के छन्द, रहीम के दोहे और अनेक कविताएँ कंठस्थ थीं। गीत-संगीत, नाटकों में अभिनय, सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में भागीदारी कविता पाठ एवं कविताओं पर आधारित अन्त्याक्षरी मेरे रुचिकर क्षेत्र रहे हैं, वर्तमान शासकीय, पारिवारिक एवं सामाजिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ यथासंभव राष्ट्र-प्रेम और समाज की समस्याओं पर लिखना और मंच संचालन करना बेहद पसंद है।
घरेलू नाम जसपाल होने के कारण सब लोग प्यार से जस्सू कह कर पुकारा करते थे।प्राथमिक पाठशाला में प्रवेश के दौरान हेडमास्टर जी ने नाम और जन्म तिथि बदल कर जसपाल की जगह यशपाल सिंह एवं जन्म-तिथि 01 मार्च 1960 कर दिया। प्रारम्भिक शिक्षा गाँव की पाठशाला में ही हुई जबकि माध्यमिक शिक्षा पास के गाँव में स्थित 'आदर्श जूनियर हाई स्कूल, बड़गाँव(सहारनपुर)' में 1972-1975 तक प्राप्त की।हाई स्कूल एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा के लिये 'महाराणा प्रताप स्मारक इन्टर कॉलिज, शिमलाना, सहारनपुर (उ.प्र.)' में सन् 1975-1979 तक पढ़ाई की। तत्पश्चात व्यावसायिक शिक्षा हेतु कन्हैया लाल पालिटेक्निक, रुड़की, (उ.प्र.) [उस समय रुड़की उत्तर प्रदेश का हिस्सा थी] प्रवेश लेकर 1972 में इलेक्ट्रानिक्स इन्जीनियरिंग म़ें त्रिवर्षीय डिप्लोमा प्राप्त किया।
शासकीय सेवा के सफ़र की शुरूआत सन् 1972 से भारत सरकार, वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग के संस्थान प्रतिभूति कागज़ कारखाना, होशंगाबाद (म.प्र.) से एक साधारण कर्मचारी के रूप में हुई। परन्तु माता-पिता से विरासत मे मिली मेहनत, लगन और ईमानदारी की शिक्षा को अपने जीवन का अंग बनाकर तरक्की की सीढ़ियाँ चढ़ना प्रारम्भ किया और सन् 1990 में संघ लोक सेवा आयोग (यू.पी.एस.सी.), नई दिल्ली द्वारा किये गये चयन से प्रतिभूति कागज़ कारखाना, होशंगाबाद (म.प्र.) के लिये अभियन्ता (ई.एंड़.आई.) के पद पर नियुक्ति हुई।
शासकीय कार्यों एवं जिम्मेदारियों का निष्पादन पूर्ण समर्पण के साथ करते हुये उच्च शिक्षा हेतु प्रयास जारी रखे और 1995 में 'इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली' से 'डिप्लोमा इन मेनेजमेंट की उपाधि प्राप्त की, एवं सन् 2001 में 'इंस्टीटयूट आफ़ इंजीनियरिंग' में डिग्री प्राप्त की। और वर्तमान में प्रतिभूति कागज़ कारखाना, होशंगाबाद (म.प्र.) के सहायक प्रबंध (ई एडं आई) के पद पर रहते हुऐ अन्य पदों जैसे उप प्रबंधक (उपार्जन), इंचार्ज आई.टी. एवं जन सूचना अधिकारी की महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारियों को पूर्ण दायित्व के साथ निभा रहा हूँ। सांस्कृतिक, खेल-कूद एवं सामाजिक गतिविधियों में बचपन से ही रुचि है, बाल्यावस्था में ही सुभद्राकुमारी चौहान की 'झाँसी की रानी', रसखान के सवैये, सूरदास के पद, गिरधर की कुंडलियाँ, भूषण के छन्द, रहीम के दोहे और अनेक कविताएँ कंठस्थ थीं। गीत-संगीत, नाटकों में अभिनय, सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में भागीदारी कविता पाठ एवं कविताओं पर आधारित अन्त्याक्षरी मेरे रुचिकर क्षेत्र रहे हैं, वर्तमान शासकीय, पारिवारिक एवं सामाजिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ यथासंभव राष्ट्र-प्रेम और समाज की समस्याओं पर लिखना और मंच संचालन करना बेहद पसंद है।
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- यशपाल सिंह 'रवि'

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